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  • हिंदी दिवस की सभी लोगो को शुभकानाएं
    हिंदी दिवस की सभी लोगो को शुभकानाएं
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  • हिन्दी फिल्म के दिग्गज प्रोड्यूसर रण जौहर के पिता यश जौहर किसी पहचान के मोहताज़ नहीं थे वो खुद में एक बड़े और स्वभाव के अछे माने जाने आदमी थे यश जौहर अपनी फिल्म इंडस्ट्री की बदौलत उन्होंने काफी नाम कमाया है अगर बात करें उनकी फिल्म की जो ' कुछ कुछ होता है', कल हो ना हो' ये सब उनकी काफी सुपर हिट फ़िल्मों को प्रोड्यूस करने वाले यश जौहर आज भले ही हमारे बीच न हों मगर अपनी इन सब फिल्मों के जरिए वो आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं लोग आज भी इन्हें याद करते हैं|
    हिन्दी फिल्म के दिग्गज प्रोड्यूसर रण जौहर के पिता यश जौहर किसी पहचान के मोहताज़ नहीं थे वो खुद में एक बड़े और स्वभाव के अछे माने जाने आदमी थे यश जौहर अपनी फिल्म इंडस्ट्री की बदौलत उन्होंने काफी नाम कमाया है अगर बात करें उनकी फिल्म की जो ' कुछ कुछ होता है', कल हो ना हो' ये सब उनकी काफी सुपर हिट फ़िल्मों को प्रोड्यूस करने वाले यश जौहर आज भले ही हमारे बीच न हों मगर अपनी इन सब फिल्मों के जरिए वो आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं लोग आज भी इन्हें याद करते हैं|
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  • सलिल चौधरी एक भारतीय संगीतकार, लेखक और कवि थे जो मुख्य रूप से कई भाषाओं पर काम करते थे
    जैसे हिन्दी, मलयालम, और बंगाली फ़िल्मों के रचनाकार थे उन्होंने 13 समुद्री फ़िल्मों के लिए संगीत तैयार किए थे
    सलिल चौधरी एक भारतीय संगीतकार, लेखक और कवि थे जो मुख्य रूप से कई भाषाओं पर काम करते थे जैसे हिन्दी, मलयालम, और बंगाली फ़िल्मों के रचनाकार थे उन्होंने 13 समुद्री फ़िल्मों के लिए संगीत तैयार किए थे
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  • Ham kaise Apne content ko presentation mein change karne ke liye sahi companion ko find out karein
    Ham kaise Apne content ko presentation mein change karne ke liye sahi companion ko find out karein
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  • फ्री-बेसिक : फ्री और बेसिक दोनों पर संशय
    इन्टरनेट की दुनिया और प्रत्यक्ष दुनिया के बीच की दूरी जैसे-जैसे सिमटती जा रही है, नीति-नियमन और संचार तंत्र की राजनितिक अर्थव्यवस्था से जुड़े कई बड़े प्रश्न टकराव बन कर उभर रहे है. दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने एक बड़ा फैसला लेते हुए, इंटरनेट निरपेक्षता का समर्थन किया है और  डाटा शुल्क की दरों में भेदभाव करने पर रोक लगा दी है. इसके साथ ही भारत में फेसबुक द्वारा प्रायोजित फ्री-बेसिक के...
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  • डिजिटल इंडिया मिशन, एक बड़ा छल तो नहीं !
    इन्टरनेट की आंधी, ऑप्टिक फाइबर्स और ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी का बिछता जाल, 3जी से होकर 4जी का द्वार खोलते सूचना प्रौद्योगिकी के नए बवंडर ने मानव जीवन के सभी आयामों को प्रभावित किया है। क्या यह बदलाव महज कुछ गैजेट्स या मनोरंजन तक, आपसी संवाद और सम्प्रेषण के साधन का क्रमिक विकासमात्र है या इसका कोई दूसरा पक्ष भी है?मनुष्यता के इतिहास में कम ही ऐसे दौर रहे हैं, जहां मानवता के पक्ष में कोई बड़ा बदलाव...
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  • ई-क्रांति, ग्रामीण भारत की समस्या और तकनिकी समाधान
    तकनीक ने आधुनिक मानव समाज के व्यापक होती मूलभूत आवश्यकताओं और सुखद भविष्य के कल्पनाओं के बीच असीमित अपेक्षाओं के पुल बाँध दिए हैं. तकनीक इक्कीसवीं सदी के विकास योजनाओं की धुरी बन, बदलाव के बड़े बवंडर परोसने लगा है. लेकिन ग्रामीण भारत के दशकों पुराने बुनियादी प्रश्न मसलन शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, खेती इत्यादि अब भी चुनौती बने हुए हैं. भारत सरकार की डिजिटल इंडिया मिशन और स्मार्ट विलेज जैसी...
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  • डिजिटल इंडिया से बदलेगी शिक्षा की तस्वीर
    बदलते भारत की गुंज भारतीय भूगोल को लांघ चुकी है। बदलाव के बयार को पूरी दुनिया स्वीकारने लगी है। संचार क्रांति ने तो बदलाव की गति को और तीव्र कर दिया है। गांवों में बसने वाला भारत अब ई-क्रांति का अग्रदूत बनने की राह पर है। व्यवस्थागत संपूर्ण जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध कराने की दिशा में भारत सरकार पुरजोर कोशिश कर रही है। इसी संदर्भ में भारत सरकार ने शिक्षा-व्यवस्था को पूरी तरह से डिजिटलाइज्ड करने...
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  • If you have any questions and wish to ask something that could also benefit others, use the forum instead of the post box. The link to the forum area is below
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  • गौरी नंदन गजानन
    गिरिजा नंदन निरंजना
    पार्वती नंदन शुभानन
    पाहि प्रभो मां पाहि प्रसन्ना ।

    #ganeshutsav
    #ganeshotsav2023
    #ganeshfestival
    #ganeshchaturthi2023
    गौरी नंदन गजानन गिरिजा नंदन निरंजना पार्वती नंदन शुभानन पाहि प्रभो मां पाहि प्रसन्ना । #ganeshutsav #ganeshotsav2023 #ganeshfestival #ganeshchaturthi2023
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  • Dear Members, Use the Invite Friends button at the bottom right sidebar to invite your friends to the community. It would allow you to work with them and explore other possibilities together.

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  • बिहार के सरकारी स्कूलों का संघर्ष:

    भारत के बिहार में सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता का मुद्दा कई कारकों के साथ एक जटिल और बहुआयामी समस्या है। यहां कुछ प्रमुख कारण बताए गए हैं कि क्यों बिहार में सरकारी स्कूलों में अच्छी शिक्षा प्रदान करने को लेकर ऐतिहासिक संघर्ष रहा है:

    1. बुनियादी ढाँचा और सुविधाएँ: बिहार के कई सरकारी स्कूलों में कक्षाओं, पुस्तकालयों और स्वच्छता सुविधाओं सहित उचित बुनियादी ढाँचे का अभाव है। इससे सीखने का माहौल बाधित होता है और छात्र और शिक्षक दोनों हतोत्साहित होते हैं।

    2. योग्य शिक्षकों की कमी: बिहार में योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों की काफी कमी रही है। भर्ती प्रक्रिया और शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जिसके कारण कुशल शिक्षकों की कमी हो गई है।

    3. शिक्षक की अनुपस्थिति: जब शिक्षक उपस्थित होते हैं, तब भी अनुपस्थिति एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। कुछ शिक्षक अन्य नौकरियों में संलग्न होने या अपने कर्तव्यों की उपेक्षा करने के लिए जाने जाते हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

    4. संसाधनों की कमी: सरकारी स्कूलों में अक्सर आवश्यक शिक्षण सामग्री, पाठ्यपुस्तकों और प्रौद्योगिकी का अभाव होता है। इससे सर्वांगीण एवं आधुनिक शिक्षा प्रदान करना कठिन हो जाता है।

    5. पाठ्यक्रम और शिक्षाशास्त्र: सरकारी स्कूलों में पाठ्यक्रम और शिक्षण विधियाँ अद्यतन या प्रभावी नहीं हो सकती हैं। इसके लिए अधिक छात्र-केंद्रित और इंटरैक्टिव शिक्षण दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

    6. सामाजिक-आर्थिक कारक: बिहार में कई छात्र आर्थिक रूप से वंचित पृष्ठभूमि से आते हैं। गरीबी, उचित पोषण तक पहुंच की कमी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उनकी प्रभावी ढंग से सीखने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।

    7. नौकरशाही बाधाएँ: बिहार में शिक्षा प्रणाली नौकरशाही लालफीताशाही से ग्रस्त हो सकती है, जो निर्णय लेने की प्रक्रियाओं को धीमा कर सकती है और सुधारों में बाधा डाल सकती है।

    8. राजनीतिक हस्तक्षेप: राजनीति कभी-कभी स्कूलों के कामकाज में हस्तक्षेप कर सकती है, जिससे शिक्षकों की नियुक्ति और संसाधनों के आवंटन पर असर पड़ता है।

    9. कम जवाबदेही: शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही की कमी से भ्रष्टाचार और धन का दुरुपयोग हो सकता है, जिससे संसाधनों का उपयोग शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार से दूर हो सकता है।

    10. सांस्कृतिक कारक: शिक्षा के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण और लैंगिक पूर्वाग्रह भी एक भूमिका निभा सकते हैं। कुछ क्षेत्रों में, लड़कियों को अपनी शिक्षा तक पहुँचने और उसे जारी रखने में अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

    इन मुद्दों के समाधान और बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। इसमें बुनियादी ढांचे, शिक्षक प्रशिक्षण, पाठ्यक्रम सुधार, बेहतर प्रशासन और सामुदायिक भागीदारी में निवेश शामिल हो सकता है। इसके अतिरिक्त, शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी और मूल्यांकन तंत्र मौजूद होना चाहिए।
    बिहार के सरकारी स्कूलों का संघर्ष: भारत के बिहार में सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता का मुद्दा कई कारकों के साथ एक जटिल और बहुआयामी समस्या है। यहां कुछ प्रमुख कारण बताए गए हैं कि क्यों बिहार में सरकारी स्कूलों में अच्छी शिक्षा प्रदान करने को लेकर ऐतिहासिक संघर्ष रहा है: 1. बुनियादी ढाँचा और सुविधाएँ: बिहार के कई सरकारी स्कूलों में कक्षाओं, पुस्तकालयों और स्वच्छता सुविधाओं सहित उचित बुनियादी ढाँचे का अभाव है। इससे सीखने का माहौल बाधित होता है और छात्र और शिक्षक दोनों हतोत्साहित होते हैं। 2. योग्य शिक्षकों की कमी: बिहार में योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों की काफी कमी रही है। भर्ती प्रक्रिया और शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जिसके कारण कुशल शिक्षकों की कमी हो गई है। 3. शिक्षक की अनुपस्थिति: जब शिक्षक उपस्थित होते हैं, तब भी अनुपस्थिति एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। कुछ शिक्षक अन्य नौकरियों में संलग्न होने या अपने कर्तव्यों की उपेक्षा करने के लिए जाने जाते हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है। 4. संसाधनों की कमी: सरकारी स्कूलों में अक्सर आवश्यक शिक्षण सामग्री, पाठ्यपुस्तकों और प्रौद्योगिकी का अभाव होता है। इससे सर्वांगीण एवं आधुनिक शिक्षा प्रदान करना कठिन हो जाता है। 5. पाठ्यक्रम और शिक्षाशास्त्र: सरकारी स्कूलों में पाठ्यक्रम और शिक्षण विधियाँ अद्यतन या प्रभावी नहीं हो सकती हैं। इसके लिए अधिक छात्र-केंद्रित और इंटरैक्टिव शिक्षण दृष्टिकोण की आवश्यकता है। 6. सामाजिक-आर्थिक कारक: बिहार में कई छात्र आर्थिक रूप से वंचित पृष्ठभूमि से आते हैं। गरीबी, उचित पोषण तक पहुंच की कमी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उनकी प्रभावी ढंग से सीखने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। 7. नौकरशाही बाधाएँ: बिहार में शिक्षा प्रणाली नौकरशाही लालफीताशाही से ग्रस्त हो सकती है, जो निर्णय लेने की प्रक्रियाओं को धीमा कर सकती है और सुधारों में बाधा डाल सकती है। 8. राजनीतिक हस्तक्षेप: राजनीति कभी-कभी स्कूलों के कामकाज में हस्तक्षेप कर सकती है, जिससे शिक्षकों की नियुक्ति और संसाधनों के आवंटन पर असर पड़ता है। 9. कम जवाबदेही: शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही की कमी से भ्रष्टाचार और धन का दुरुपयोग हो सकता है, जिससे संसाधनों का उपयोग शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार से दूर हो सकता है। 10. सांस्कृतिक कारक: शिक्षा के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण और लैंगिक पूर्वाग्रह भी एक भूमिका निभा सकते हैं। कुछ क्षेत्रों में, लड़कियों को अपनी शिक्षा तक पहुँचने और उसे जारी रखने में अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इन मुद्दों के समाधान और बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। इसमें बुनियादी ढांचे, शिक्षक प्रशिक्षण, पाठ्यक्रम सुधार, बेहतर प्रशासन और सामुदायिक भागीदारी में निवेश शामिल हो सकता है। इसके अतिरिक्त, शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी और मूल्यांकन तंत्र मौजूद होना चाहिए।
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  • Talk to the mirror

    As strange as it may sound, you need to learn to talk to your own reflection in the mirror. And not just talk, but convince it that you are the best, the most gifted, the most capable, and the most confident.

    This idea may seem ludicrous. Ignore this feeling and get down to practice. Convince yourself of your own strength and worthiness.

    ☝?Doing this exercise regularly will surely yield results.
    #yuvraj
    Talk to the mirror As strange as it may sound, you need to learn to talk to your own reflection in the mirror. And not just talk, but convince it that you are the best, the most gifted, the most capable, and the most confident. This idea may seem ludicrous. Ignore this feeling and get down to practice. Convince yourself of your own strength and worthiness. ☝?Doing this exercise regularly will surely yield results. #yuvraj
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  • People never appreciate what they have until it's gone

    Whenever a relationship or opportunity comes to an end, there is always difficult times of mourning and sad feelings associated with it. Respect that. Remember that every end entails a beginning of something new. Everything that should eventually end – ends, and you must be happy with it. Moreover, every time it happens you probably realize this fact at heart.

    ☝?But what can actually change your life is your ability to take time to invest in your future instead of dwelling on the past.
    People never appreciate what they have until it's gone Whenever a relationship or opportunity comes to an end, there is always difficult times of mourning and sad feelings associated with it. Respect that. Remember that every end entails a beginning of something new. Everything that should eventually end – ends, and you must be happy with it. Moreover, every time it happens you probably realize this fact at heart. ☝?But what can actually change your life is your ability to take time to invest in your future instead of dwelling on the past.
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  • मेरी उमर के बेरोजगारों..
    जाति धर्म के चश्मे उतारो..!!

    #बेरोजगारीकेखिलाफभारत
    मेरी उमर के बेरोजगारों.. जाति धर्म के चश्मे उतारो..!! #बेरोजगारीकेखिलाफभारत
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  • These 7 Japanese Concepts will Transform Your Life Before the End of December this Year.
    These 7 Japanese Concepts will Transform Your Life Before the End of December this Year.    1. Ikigai: This is a Japanese concept that means your ‘reason for being.’ ‘Iki’ in Japanese means ‘life,’ and ‘gai’ describes value or worth. Your ikigai is your life purpose or your bliss. It is what brings you joy and inspires you to get out of...
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