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01/01/1996
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हिंदी दिवस की सभी लोगो को शुभकानाएंहिंदी दिवस की सभी लोगो को शुभकानाएं0 Comments 0 Shares 2K Views 0 Reviews2
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किताबों की अहमियत अपनी जगह है जनाब..सबक वही याद रहते हैं , जो लोग हमें सिखा जाते हैं...
Image - pixabay
#abhiraj
किताबों की अहमियत अपनी जगह है जनाब..सबक वही याद रहते हैं , जो लोग हमें सिखा जाते हैं... Image - pixabay #abhiraj0 Comments 0 Shares 1K Views 0 Reviews
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हरिशंकर परसाई जो कि पक्के कबीर पंथी थे, वह बताते थे कि कबीर निश्चित ही कोई बड़े बवाली शख्सियत रहे होंगे, जिनके पास सौ - डेढ़ सौ पक्के लठैत रहे होंगे। आप उनके समकालीन कवियों के बारे में दीन दशा के वृत्तांत सुनते होंगे लेकिन ऐसा कोई वृत्तांत कबीर के बारे में कभी नहीं सुनेंगे। इससे यह धारणा पुष्ट होती है कि कबीर के पास पर्याप्त धन और संख्या बल रहा होगा जिससे वह विरोधियों को पिटवाकर दिमाग ठिकाने लगवा देते रहे होंगे।हरिशंकर परसाई जो कि पक्के कबीर पंथी थे, वह बताते थे कि कबीर निश्चित ही कोई बड़े बवाली शख्सियत रहे होंगे, जिनके पास सौ - डेढ़ सौ पक्के लठैत रहे होंगे। आप उनके समकालीन कवियों के बारे में दीन दशा के वृत्तांत सुनते होंगे लेकिन ऐसा कोई वृत्तांत कबीर के बारे में कभी नहीं सुनेंगे। इससे यह धारणा पुष्ट होती है कि कबीर के पास पर्याप्त धन और संख्या बल रहा होगा जिससे वह विरोधियों को पिटवाकर दिमाग ठिकाने लगवा देते रहे होंगे।0 Comments 0 Shares 1K Views 0 Reviews
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पिछले चार दिन बड़ी भागदौड़ में निकले, आज सुबह (दोपहर) जब सो कर उठा तो तरह तरह (?) के वीडियो, meme और शोक संदेशों से पूरा इंटरनेट भरा पड़ा था।
सबको बांचने के बाद अंदर से एक ही आवाज आई।
" बस त्रिवेदी बचेगा "... ?पिछले चार दिन बड़ी भागदौड़ में निकले, आज सुबह (दोपहर) जब सो कर उठा तो तरह तरह (?) के वीडियो, meme और शोक संदेशों से पूरा इंटरनेट भरा पड़ा था। सबको बांचने के बाद अंदर से एक ही आवाज आई। " बस त्रिवेदी बचेगा "... ?0 Comments 0 Shares 1K Views 0 Reviews
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कभी - कभी सीखने के लिए झुकना भी जरुरी होता है, विनम्रता हमें मूल्यवान बनाती है...
#Abhirajthakur
#bhokalकभी - कभी सीखने के लिए झुकना भी जरुरी होता है, विनम्रता हमें मूल्यवान बनाती है... #Abhirajthakur #bhokal0 Comments 0 Shares 1K Views 0 Reviews
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संगीत समझने के लिए आपको भाषा की जरूरत नहीं होती, आप किसी भी देश, प्रांत या भाषा का गाना या लोक - गीत उठा कर देख लीजिए, अगर आप क्षेत्रीय पूर्वाग्रह से ग्रसित नहीं हैं तो आपको वो जरूर पसंद आयेगा।
क्योंकि आपको उसे सुनने और फील करने की जरूरत होती है न कि शब्दों के पीछे पड़ने की ( यहां उन गीतों को न गिना जाए जो बनाए ही टारगेटेड हैं )
लगभग तीन दिन से मैं लैपटॉप को हाथ नहीं लगा पाया हूं, और न ही कोई काम करने का वक्त मिला अगले एक हफ्ते भी यही आलम रहने वाला है, मैं अपने काम से ज्यादा काम के वक्त लगाए गए अलग अलग भाषा देश के इंस्ट्रुमेंटल संगीत को ज्यादा मिस कर रहा हूं।
कहते हैं ब्रम्हांड का पहला नाद ॐ है।
हालिया पढ़ी एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों ने भी इसकी पुष्टि की है कि जो निरंतर बजती ध्वनि या साउंड वेव्स हमारे पकड़ में आई हैं वो ॐ से मिलती जुलती हैं, वैज्ञानिक तर्कों को एक बार मंड,ल के लिए साइड में रख दें और अगर गौर करें तो यहां अपने आस पास हर चीज की एक साउंड वेव्स है, बिना आवाज के आप जीवित रह ही नहीं सकते, भले ही आपको उनका सुनाई देना समझ में आए या न आए, पर हम सब एक निरंतर बजती साउंड वेव्स के जाल के अंदर ही रहते हैं, ज्यादा दूर न ही जाओ तो कभी अपने हाथ की हथेली को सीने पर रखकर फील ले लेना, वहां भी एक संगीत बजता है, इस बात पर मुझे Ankita Jain जी कि लिखी एक लाइन याद आ रही है,
" दुनिया में इससे रोमांचकारी और क्या होगा कि अब आपके सीने के अलावा आपके पेट में भी एक दिल धड़क रहा है। "
यह कोट उन्होंने अपनी किताब ' मैं से मां तक ' में लिखा है।
कितनी खूबसूरत बात है, एक नजर से देखने में साधारण लगती है पर अगर फील किया जाए तो...
खैर बात हो रही थी संगीत की...ध्वनि की...
काफी लोग जानते हैं, पर कुछ ही मानते और उससे भी कम लोग ये समझते हैं कि संगीत एक तरीके से हीलिंग का भी काम करता है, बशर्ते आप अपने आप को उसकी लय में बहने के लिए ढीला छोड़ दें।
अगर आपको अपनी कार्य कुशलता, कार्य क्षमता और सबसे जरूरी, मानसिक शांति पाकर एकाग्र चित्त होना है तो, उल जलूल गीतों को परे करिए और संगीत की तरफ फोकस करिए, यूट्यूब भरा पड़ा है ऐसी चीजों से।
अगर दिल से देखेंगे तो आपको हर जगह संगीत नजर आएगा,
बहते पानी में...
जलती चटकती हुई लकड़ियों में...
किसी पहाड़ी दर्रे में पेड़ों के पत्तों को छूकर आती हवाओं में...
हर जगह प्राकृतिक रूप से भी संगीत व्यापत है, बस जरूरत है तो खुद को बंधनों से मुक्त करने की।
#Abhirajthakur
#bhokalbanaraheसंगीत समझने के लिए आपको भाषा की जरूरत नहीं होती, आप किसी भी देश, प्रांत या भाषा का गाना या लोक - गीत उठा कर देख लीजिए, अगर आप क्षेत्रीय पूर्वाग्रह से ग्रसित नहीं हैं तो आपको वो जरूर पसंद आयेगा। क्योंकि आपको उसे सुनने और फील करने की जरूरत होती है न कि शब्दों के पीछे पड़ने की ( यहां उन गीतों को न गिना जाए जो बनाए ही टारगेटेड हैं ) लगभग तीन दिन से मैं लैपटॉप को हाथ नहीं लगा पाया हूं, और न ही कोई काम करने का वक्त मिला अगले एक हफ्ते भी यही आलम रहने वाला है, मैं अपने काम से ज्यादा काम के वक्त लगाए गए अलग अलग भाषा देश के इंस्ट्रुमेंटल संगीत को ज्यादा मिस कर रहा हूं। कहते हैं ब्रम्हांड का पहला नाद ॐ है। हालिया पढ़ी एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों ने भी इसकी पुष्टि की है कि जो निरंतर बजती ध्वनि या साउंड वेव्स हमारे पकड़ में आई हैं वो ॐ से मिलती जुलती हैं, वैज्ञानिक तर्कों को एक बार मंड,ल के लिए साइड में रख दें और अगर गौर करें तो यहां अपने आस पास हर चीज की एक साउंड वेव्स है, बिना आवाज के आप जीवित रह ही नहीं सकते, भले ही आपको उनका सुनाई देना समझ में आए या न आए, पर हम सब एक निरंतर बजती साउंड वेव्स के जाल के अंदर ही रहते हैं, ज्यादा दूर न ही जाओ तो कभी अपने हाथ की हथेली को सीने पर रखकर फील ले लेना, वहां भी एक संगीत बजता है, इस बात पर मुझे Ankita Jain जी कि लिखी एक लाइन याद आ रही है, " दुनिया में इससे रोमांचकारी और क्या होगा कि अब आपके सीने के अलावा आपके पेट में भी एक दिल धड़क रहा है। " यह कोट उन्होंने अपनी किताब ' मैं से मां तक ' में लिखा है। कितनी खूबसूरत बात है, एक नजर से देखने में साधारण लगती है पर अगर फील किया जाए तो... खैर बात हो रही थी संगीत की...ध्वनि की... काफी लोग जानते हैं, पर कुछ ही मानते और उससे भी कम लोग ये समझते हैं कि संगीत एक तरीके से हीलिंग का भी काम करता है, बशर्ते आप अपने आप को उसकी लय में बहने के लिए ढीला छोड़ दें। अगर आपको अपनी कार्य कुशलता, कार्य क्षमता और सबसे जरूरी, मानसिक शांति पाकर एकाग्र चित्त होना है तो, उल जलूल गीतों को परे करिए और संगीत की तरफ फोकस करिए, यूट्यूब भरा पड़ा है ऐसी चीजों से। अगर दिल से देखेंगे तो आपको हर जगह संगीत नजर आएगा, बहते पानी में... जलती चटकती हुई लकड़ियों में... किसी पहाड़ी दर्रे में पेड़ों के पत्तों को छूकर आती हवाओं में... हर जगह प्राकृतिक रूप से भी संगीत व्यापत है, बस जरूरत है तो खुद को बंधनों से मुक्त करने की। #Abhirajthakur #bhokalbanarahe0 Comments 0 Shares 1K Views 0 Reviews
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एक मात्र सरकारी जॉब जो मुझे पसंद है, हम सीबीआई से हैँ..... असली वाले ? #bhokalbanarahe0 Comments 0 Shares 1K Views 0 Reviews
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Bhokal Desk डिअर टीम कृपया संज्ञान लें...क्रिएटर कैटेगरी में voice over का ऑप्शन दो बार आ रहा है.
[master] डिअर टीम कृपया संज्ञान लें...क्रिएटर कैटेगरी में voice over का ऑप्शन दो बार आ रहा है.1 Comments 0 Shares 1K Views 0 Reviews3
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