• रमण महर्षि कह गए, “भक्ति ज्ञान की माता है। प्रेम है तो ज्ञान आ जाता है। भक्ति ज्ञान की माता है।”

    प्रेम है तो धीरे-धीरे ज्ञान आ जाएगा, पर ज्ञान है तो उससे प्रेम नहीं आ जाएगा; बेटा माँ को नहीं पैदा कर देगा। हम बड़े प्रेमहीन, रूखे लोग होते है; कुछ पानी नहीं होता हस्ती में। सब बिल्कुल सूखा-सूखा। हम में से ज़्यादातर लोगों के तो आँसू भी नहीं बहते ठीक से। आँख से कुछ बह रहा है। क्या? कीचड़; आँसू नहीं।

    #AnandMishra #Motivation #PowerCapsule
    रमण महर्षि कह गए, “भक्ति ज्ञान की माता है। प्रेम है तो ज्ञान आ जाता है। भक्ति ज्ञान की माता है।” प्रेम है तो धीरे-धीरे ज्ञान आ जाएगा, पर ज्ञान है तो उससे प्रेम नहीं आ जाएगा; बेटा माँ को नहीं पैदा कर देगा। हम बड़े प्रेमहीन, रूखे लोग होते है; कुछ पानी नहीं होता हस्ती में। सब बिल्कुल सूखा-सूखा। हम में से ज़्यादातर लोगों के तो आँसू भी नहीं बहते ठीक से। आँख से कुछ बह रहा है। क्या? कीचड़; आँसू नहीं। #AnandMishra #Motivation #PowerCapsule
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  • ये कहावत तो सुनी होगी न
    पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।

    अब इसका अर्थ भी सरल तरीक़े से समझो
    जग भर को तो ज्ञान है, किसको नहीं ज्ञान है। घर-घर में वेद -पुराण रखी हुई हैं, बाइबल-क़ुरआन रखी हुई हैं। ज्ञान किसको नहीं है! काम किसके आ रहा है? काम उसके आएगा जिसके दिल में प्रेम है। उसके ज्ञान काम आ जाएगा।

    साहिब ने आगे भी बात की है। उन्होंने कहा है कि ज्ञान तुम्हारे पास नहीं भी हो, पर अगर प्रेम है तो चल पड़ोगे और धीरे-धीरे ज्ञान आता जाएगा। पूछ लोगे, इससे पूछ लोगे, उससे पूछ लोगे; कुछ अनुभव से आएगा, कुछ ध्यान से आएगा।
    #AnandMishra #PowerCapsule #Motivation
    ये कहावत तो सुनी होगी न पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय। अब इसका अर्थ भी सरल तरीक़े से समझो जग भर को तो ज्ञान है, किसको नहीं ज्ञान है। घर-घर में वेद -पुराण रखी हुई हैं, बाइबल-क़ुरआन रखी हुई हैं। ज्ञान किसको नहीं है! काम किसके आ रहा है? काम उसके आएगा जिसके दिल में प्रेम है। उसके ज्ञान काम आ जाएगा। साहिब ने आगे भी बात की है। उन्होंने कहा है कि ज्ञान तुम्हारे पास नहीं भी हो, पर अगर प्रेम है तो चल पड़ोगे और धीरे-धीरे ज्ञान आता जाएगा। पूछ लोगे, इससे पूछ लोगे, उससे पूछ लोगे; कुछ अनुभव से आएगा, कुछ ध्यान से आएगा। #AnandMishra #PowerCapsule #Motivation
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  • ज़्यादातर लोग ज्ञान का क्या करते हैं ? कभी ये सवाल आपके मन में आया है ? मैं बताता हूँ क्या करते हैं. ज्ञान इकट्ठा करके सो जाते हैं.कहते हैं, “बढ़िया चीज़ मिल गई है। अब सोते हैं इसी पर।” तो बढ़िया चीज़ तुम्हें दी किसलिए गई थी? कि उसका उपयोग करके मंज़िल तक जाओ। पर मंज़िल के लिए कोई चाहत ही नहीं। कुछ लोग और आगे के होते हैं, वो कहते हैं, “बढ़िया गाड़ी मिली है। चलो बेच ही देते हैं।” #AnandMishra #Motivation #PowerCapsule
    ज़्यादातर लोग ज्ञान का क्या करते हैं ? कभी ये सवाल आपके मन में आया है ? मैं बताता हूँ क्या करते हैं. ज्ञान इकट्ठा करके सो जाते हैं.कहते हैं, “बढ़िया चीज़ मिल गई है। अब सोते हैं इसी पर।” तो बढ़िया चीज़ तुम्हें दी किसलिए गई थी? कि उसका उपयोग करके मंज़िल तक जाओ। पर मंज़िल के लिए कोई चाहत ही नहीं। कुछ लोग और आगे के होते हैं, वो कहते हैं, “बढ़िया गाड़ी मिली है। चलो बेच ही देते हैं।” #AnandMishra #Motivation #PowerCapsule
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  • ये किन कल्पनाओं में हो कि इधर-उधर जाकर कहीं भाग गए, छुप गए तो मुक्ति मिल जाएगी ? जिन्हें अपनी दासता बरक़रार रखनी हो, वो भले ही संघर्ष ना करें, पर जो मुक्ति के प्रार्थी हों, उनका संघर्ष के बिना कैसे काम चलेगा? उन्हें तो घोर संघर्ष करना पड़ेगा, भीतर भी और बाहर भी। अर्जुन एक-एक तीर जो चला रहा है, वो कौरवों मात्र पर नहीं चला रहा है; अर्जुन का एक-एक तीर पुराने अर्जुन पर भी चल रहा है। हर तीर के साथ पुराना अर्जुन मिटता जा रहा है और एक नए अर्जुन का जन्म हो रहा है।

    पुराना अर्जुन कौन? पुराना अर्जुन वो जो पाण्डु पुत्र था; पुराना अर्जुन वो जो भीष्म के वंश का था; पुराना अर्जुन वो जो द्रोण का शिष्य था। नया अर्जुन कौन? जो सिर्फ कृष्ण का है। ये मुक्ति है— अर्जुन स्वयं से मुक्त हो रहा है एक-एक तीर के साथ। इसको कहते हैं मुक्ति। दूसरों को नहीं मार रहा अर्जुन; दूसरों से पहले स्वयं को मार रहा है। आज पहला अध्याय पढ़ा आपने। पहले अध्याय का जो अर्जुन है, वो अट्ठारहवें अध्याय में कहीं मिलेगा? तो कहाँ गया पहले अध्याय का अर्जुन? कहाँ गया?

    अट्ठारवें अध्याय तक आते-आते पहले अध्याय का अर्जुन कहाँ गया? मर गया। किसने मारा उसे? अर्जुन ने ही मारा। ये मुक्ति है। देह होकर देखोगे, स्थूल दृष्टि से देखोगे तो तुम्हें दिखाई पड़ेगा कि अर्जुन तो तीर चला रहा है दूसरों पर। वास्तव में अर्जुन तीर चला रहा है स्वयं पर। इस युद्ध को लड़ना अर्जुन की साधना भी है – वो अपने ही पूर्वग्रहों से, मोह से, बँधनों से मुक्त हुआ जा रहा है - ऐसे मिलती है मुक्ति। जीव पैदा हुए हो, बेटा। लगातार कर्म तो करना ही है। एक कर्म है तीर चलाना, एक कर्म है भाग जाना।

    तुम कह रहे हो कि तीर चलाने से मुक्ति मिल गई भाग जाने से, अब भाग जाने से मुक्ति कैसे मिलेगी ? कर्म तो तुमने दोनों ही दशाओं में किया ही न। तीर चलाना एक कर्म था और मैदान से भाग जाना भी एक कर्म होता। तीर चलाने से मुक्ति मिली भाग जाने से, और अब ये जो भाग जाने का कर्म है, इससे मुक्ति कैसे मिलेगी, बोलो?
    #Anand_Mishra #Motivation
    ये किन कल्पनाओं में हो कि इधर-उधर जाकर कहीं भाग गए, छुप गए तो मुक्ति मिल जाएगी ? जिन्हें अपनी दासता बरक़रार रखनी हो, वो भले ही संघर्ष ना करें, पर जो मुक्ति के प्रार्थी हों, उनका संघर्ष के बिना कैसे काम चलेगा? उन्हें तो घोर संघर्ष करना पड़ेगा, भीतर भी और बाहर भी। अर्जुन एक-एक तीर जो चला रहा है, वो कौरवों मात्र पर नहीं चला रहा है; अर्जुन का एक-एक तीर पुराने अर्जुन पर भी चल रहा है। हर तीर के साथ पुराना अर्जुन मिटता जा रहा है और एक नए अर्जुन का जन्म हो रहा है। पुराना अर्जुन कौन? पुराना अर्जुन वो जो पाण्डु पुत्र था; पुराना अर्जुन वो जो भीष्म के वंश का था; पुराना अर्जुन वो जो द्रोण का शिष्य था। नया अर्जुन कौन? जो सिर्फ कृष्ण का है। ये मुक्ति है— अर्जुन स्वयं से मुक्त हो रहा है एक-एक तीर के साथ। इसको कहते हैं मुक्ति। दूसरों को नहीं मार रहा अर्जुन; दूसरों से पहले स्वयं को मार रहा है। आज पहला अध्याय पढ़ा आपने। पहले अध्याय का जो अर्जुन है, वो अट्ठारहवें अध्याय में कहीं मिलेगा? तो कहाँ गया पहले अध्याय का अर्जुन? कहाँ गया? अट्ठारवें अध्याय तक आते-आते पहले अध्याय का अर्जुन कहाँ गया? मर गया। किसने मारा उसे? अर्जुन ने ही मारा। ये मुक्ति है। देह होकर देखोगे, स्थूल दृष्टि से देखोगे तो तुम्हें दिखाई पड़ेगा कि अर्जुन तो तीर चला रहा है दूसरों पर। वास्तव में अर्जुन तीर चला रहा है स्वयं पर। इस युद्ध को लड़ना अर्जुन की साधना भी है – वो अपने ही पूर्वग्रहों से, मोह से, बँधनों से मुक्त हुआ जा रहा है - ऐसे मिलती है मुक्ति। जीव पैदा हुए हो, बेटा। लगातार कर्म तो करना ही है। एक कर्म है तीर चलाना, एक कर्म है भाग जाना। तुम कह रहे हो कि तीर चलाने से मुक्ति मिल गई भाग जाने से, अब भाग जाने से मुक्ति कैसे मिलेगी ? कर्म तो तुमने दोनों ही दशाओं में किया ही न। तीर चलाना एक कर्म था और मैदान से भाग जाना भी एक कर्म होता। तीर चलाने से मुक्ति मिली भाग जाने से, और अब ये जो भाग जाने का कर्म है, इससे मुक्ति कैसे मिलेगी, बोलो? #Anand_Mishra #Motivation
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  • तस्वीर अच्छी भले न हो लेकिन इसके पीछे की कहानी बहुत अच्छी है
    हम अच्छी चीजों से तो कुछ अच्छा सीखते नहीं तो बुरी चीजों से भला कैसे सीख लेंगे और हमारी यही आदत हमें नए स्किल सीखने से रोकती है
    चलो एक बार कचरा बिनने वाले को समझते हैं अब आप सोच रहे होंगे कि कचरा बिनने वाले से भला क्या सीख लेंगे हम ? चलो इसको समझते हैं कचरा बिनने वाला उन चीजों को इकट्ठा करता है जो हमारे लिए बिल्कुल बेकार हो चुकी होती हैं यानी हमारे हिसाब वो किसी भी काम की नहीं होती और हम उन चीजों को फेक देते हैं लेकिन कचरा बिनने वाला ऐसे बेकार चीजों को इकट्ठा करके उनसे भी काम की चीजे निकाल लेता है और वो बेचकर पैसे कमा लेता है , मतलब एक इंसान बेकार से बेकार चीजों से भी अच्छी चीजें ढूढ़ ले रहा है और हम अच्छी चीजों ,अच्छे लोगों के आस-पास रहकर भी कुछ नहीं सीख पाते हैं क्यों क्योंकि कहीं न कहीं इसमें हमारा ईगो बीच में आ जाता है जो हमें नई स्किल को सीखने से रोक देता है लेकिन अगर आप एक बार सिर्फ ये उद्देश्य लेकर चलें कि हमें जो कुछ भी नया सीखने को मिलेगा ( चाहे अपने छोटों से या बड़ों से ) सीखेंगे तो देखना बहुत कम समय में आप तेज़ी से ग्रोथ कर जायेंगे.
    #Anand_Mishra #motivation #power_capsule
    तस्वीर अच्छी भले न हो लेकिन इसके पीछे की कहानी बहुत अच्छी है हम अच्छी चीजों से तो कुछ अच्छा सीखते नहीं तो बुरी चीजों से भला कैसे सीख लेंगे और हमारी यही आदत हमें नए स्किल सीखने से रोकती है चलो एक बार कचरा बिनने वाले को समझते हैं अब आप सोच रहे होंगे कि कचरा बिनने वाले से भला क्या सीख लेंगे हम ? चलो इसको समझते हैं कचरा बिनने वाला उन चीजों को इकट्ठा करता है जो हमारे लिए बिल्कुल बेकार हो चुकी होती हैं यानी हमारे हिसाब वो किसी भी काम की नहीं होती और हम उन चीजों को फेक देते हैं लेकिन कचरा बिनने वाला ऐसे बेकार चीजों को इकट्ठा करके उनसे भी काम की चीजे निकाल लेता है और वो बेचकर पैसे कमा लेता है , मतलब एक इंसान बेकार से बेकार चीजों से भी अच्छी चीजें ढूढ़ ले रहा है और हम अच्छी चीजों ,अच्छे लोगों के आस-पास रहकर भी कुछ नहीं सीख पाते हैं क्यों क्योंकि कहीं न कहीं इसमें हमारा ईगो बीच में आ जाता है जो हमें नई स्किल को सीखने से रोक देता है लेकिन अगर आप एक बार सिर्फ ये उद्देश्य लेकर चलें कि हमें जो कुछ भी नया सीखने को मिलेगा ( चाहे अपने छोटों से या बड़ों से ) सीखेंगे तो देखना बहुत कम समय में आप तेज़ी से ग्रोथ कर जायेंगे. #Anand_Mishra #motivation #power_capsule
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  • हम चाहते तो हैं जीतना लेकिन उसके लिए कितना काम करना पड़ेगा , कितनी मेहनत करनी पड़ेगी, इसके बारे में थोड़ा कम गंभीर होते हैं,
    हाँ मोटिवेशनल वीडियो देखकर तो हम मोटिवेट होना चाहते हैं लेकिन सही रास्ते में चलकर मेहनत नहीं करना चाहते ,
    क्योंकि हमारे पास बहानों की दुकान जो है भई. हाँ हमे दूसरों को सफल देखकर ज़रूर जलन होती है लेकिन उसकी सफलता के पीछे का संघर्ष हम नहीं पढ़ना चाहते हैं. तो जब तक बहानों की पोटली को जलाएंगे नहीं , सच में मेहनत करेंगे नहीं , हवा में तीर चलना नहीं छोड़ेंगे तब तक We can not Win.
    #Anand_Mishra #Motivation #bhokal_bna_rahe
    हम चाहते तो हैं जीतना लेकिन उसके लिए कितना काम करना पड़ेगा , कितनी मेहनत करनी पड़ेगी, इसके बारे में थोड़ा कम गंभीर होते हैं, हाँ मोटिवेशनल वीडियो देखकर तो हम मोटिवेट होना चाहते हैं लेकिन सही रास्ते में चलकर मेहनत नहीं करना चाहते , क्योंकि हमारे पास बहानों की दुकान जो है भई. हाँ हमे दूसरों को सफल देखकर ज़रूर जलन होती है लेकिन उसकी सफलता के पीछे का संघर्ष हम नहीं पढ़ना चाहते हैं. तो जब तक बहानों की पोटली को जलाएंगे नहीं , सच में मेहनत करेंगे नहीं , हवा में तीर चलना नहीं छोड़ेंगे तब तक We can not Win. #Anand_Mishra #Motivation #bhokal_bna_rahe
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  • हमारा जीवन भी बस ऐसे ही रोशनी से गुजरता है। थोड़ा अँधेरा लिए हुए थोड़ा उजाला लिए हुए। जिसकी तरफ हम ज़्यादा ध्यान देते हैं,जीवन भी उसी तरफ मुड़ता जाता है। अँधेरा डराता है और उजाला उम्मीद देता है। हम उम्मीद पर भरोसा नहीं करते हैं लेकिन डर तुरंत जाते हैं। होना इसका उल्टा चाहिए। ये आस-पास के पहाड़ हमारी आस पास की मुश्किलें हैं। इनको तो ध्यान ही नहीं देना है भई। इनके सहारे ही तो हमें अँधेरे से बाहर निकलना है। तभी तो जो रोशनी अभी हमें थोड़ी थोड़ी दिख रही है वो पूरी दिखेगी। तो आपको क्या अच्छा लगता है डार्क लाइट वाली रोशनी या अँधेरा ।
    #Anand_Mishra #Power_Capsule #motivation
    हमारा जीवन भी बस ऐसे ही रोशनी से गुजरता है। थोड़ा अँधेरा लिए हुए थोड़ा उजाला लिए हुए। जिसकी तरफ हम ज़्यादा ध्यान देते हैं,जीवन भी उसी तरफ मुड़ता जाता है। अँधेरा डराता है और उजाला उम्मीद देता है। हम उम्मीद पर भरोसा नहीं करते हैं लेकिन डर तुरंत जाते हैं। होना इसका उल्टा चाहिए। ये आस-पास के पहाड़ हमारी आस पास की मुश्किलें हैं। इनको तो ध्यान ही नहीं देना है भई। इनके सहारे ही तो हमें अँधेरे से बाहर निकलना है। तभी तो जो रोशनी अभी हमें थोड़ी थोड़ी दिख रही है वो पूरी दिखेगी। तो आपको क्या अच्छा लगता है डार्क लाइट वाली रोशनी या अँधेरा । #Anand_Mishra #Power_Capsule #motivation
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  • #yuvrajmishra #motivation
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  • #yuvrajmishra #motivation
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  • #yuvrajmishra #motivation
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  • Today's #motivation  with Yuvraj Mishra
    #yuvrajmishra #entrepreneurship #marketing #motivationalquote
    Today's #motivation  with Yuvraj Mishra #yuvrajmishra #entrepreneurship #marketing #motivationalquote
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  • ताकत जीतने से नहीं आती,
    आपके संघर्ष आपकी ताकत पैदा
    करते हैं। जब आप मुसीबतों से गुजरते
    हैं और हार नहीं मानते हैं, वही
    आपकी असली ताकत है।
    #yuvrajmishra #motivation
    ताकत जीतने से नहीं आती, आपके संघर्ष आपकी ताकत पैदा करते हैं। जब आप मुसीबतों से गुजरते हैं और हार नहीं मानते हैं, वही आपकी असली ताकत है। #yuvrajmishra #motivation
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